अयोध्या/देहरादून | विशेष रिपोर्ट
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा प्रकरण ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि के बाद अब मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता, जवाबदेही और दान राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
शुरुआत में पूरे दिन दोनों नेताओं के इस्तीफे को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों और सहयोगियों ने इस्तीफे की खबरों का खंडन किया, जबकि देर शाम ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पुष्टि की कि दोनों के इस्तीफे प्राप्त हो चुके हैं और आगामी ट्रस्ट बैठक में उन पर विचार किया जाएगा।
इसी बीच यह चर्चा भी तेज हो गई कि ट्रस्ट में उनकी जिम्मेदारियां अब किसे सौंपी जाएंगी। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन का नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में एसआईटी जांच जारी है। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि चांदी की ईंटों, आभूषणों और अन्य बहुमूल्य दान सामग्री का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है और उसका लेखा-जोखा उपलब्ध है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह पूरा रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को सौंप दिया गया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चंपत राय पहले भी जमीन खरीद और अन्य मामलों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। हालांकि ट्रस्ट और संबंधित संगठनों ने पूर्व में इन सभी आरोपों को खारिज किया था और किसी भी अनियमितता से इनकार किया था।
उधर, उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को लेकर भी नए आरोप सामने आए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि समिति के कुछ सदस्यों ने यात्रा एवं दैनिक भत्तों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त किया। उनका दावा है कि कुछ निजी या परंपरागत आयोजनों को भी आधिकारिक कार्यक्रम दिखाकर भुगतान लिया गया।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित मंदिर समिति की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
इसी बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने मंदिरों में दान राशि के उपयोग और प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तापक्ष और संबंधित संगठनों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
अब सभी की निगाहें 11 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस्तीफों पर अंतिम निर्णय के साथ-साथ ट्रस्ट की नई जिम्मेदारियों और आगे की कार्यवाही पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
फिलहाल, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के विश्वास को लेकर राष्ट्रीय स्तर की बहस का केंद्र बन चुका है। जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।












Leave a Reply