तीन साल का वक्त चाहिए था…’ प्यार, साजिश और कत्ल: एक फैसले ने तबाह कर दिए तीन परिवार

पुणे | विशेष रिपोर्ट

पुणे के बहुचर्चित केतन हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस हिरासत में लगातार पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी ने इस मामले को एक साधारण हत्या से कहीं अधिक जटिल बना दिया है। पुलिस के अनुसार, यह वारदात किसी अचानक हुए गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि कई दिनों तक चली कथित योजना का परिणाम थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी सिया और उसके कथित प्रेमी चेतन से चार दिनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों ने पूछताछ के दौरान कई बार अपने बयान बदले हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि 16 जून तक दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी, लेकिन 17 जून से गिरफ्तारी तक दोनों ने न तो एक-दूसरे को फोन किया और न ही कोई संदेश भेजा। पुलिस का मानना है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि उनके संबंधों के सबूत सामने न आ सकें।

फॉरेंसिक जांच में यह भी पता चला है कि दोनों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट, सोशल मीडिया संदेश और यहां तक कि डिलीट किए गए डेटा भी पूरी तरह मिटाने की कोशिश की गई थी। अब विशेषज्ञ उस डिजिटल साक्ष्य को दोबारा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

पुलिस की पूछताछ के अनुसार, सिया की सगाई केतन से हो चुकी थी, लेकिन वह अपने प्रेमी चेतन के साथ रहना चाहती थी। इसी बीच दोनों परिवारों ने शादी की तैयारियां तेज कर दीं। प्री-वेडिंग शूट और विवाह की तारीखों पर चर्चा शुरू होने के बाद सिया कथित रूप से मानसिक दबाव में आ गई। उसका कहना था कि उसे शादी के लिए कम से कम तीन साल का समय चाहिए, लेकिन वह अपने माता-पिता के सामने यह बात रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।

जांच में यह भी सामने आया कि चेतन ने कथित तौर पर सिया को परिवार से बात करने और यहां तक कि घर छोड़कर शादी करने का सुझाव दिया था। हालांकि पुलिस के अनुसार, सिया ने इन सभी विकल्पों को ठुकरा दिया। पूछताछ में पुलिस का दावा है कि इसी दौरान पहली बार केतन को रास्ते से हटाने की बात सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, 31 मई को केतन सिया को ट्रैकिंग के लिए एक किले पर लेकर गया था। वहीं कथित तौर पर सिया ने उस जगह को संभावित घटनास्थल के रूप में देखा। इसके बाद दोनों आरोपियों ने कथित योजना पर काम शुरू किया। पुलिस का दावा है कि 14 जून को पहली कोशिश नाकाम रही, जबकि 18 जून को कथित रूप से योजना को अंजाम दिया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, चेतन ने अपने मोबाइल फोन को घर पर छोड़ दिया ताकि उसकी लोकेशन घटनास्थल पर दर्ज न हो। हालांकि पुलिस का कहना है कि अन्य डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य इस मामले की कड़ियां जोड़ रहे हैं।

इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू केवल एक युवक की मौत नहीं, बल्कि उससे बिखरे तीन परिवार हैं। एक तरफ केतन के माता-पिता हैं, जिन्होंने अपना जवान बेटा खो दिया। दूसरी ओर सिया और चेतन के परिवार हैं, जिनका दावा है कि उन्हें अपने बच्चों की कथित योजना और रिश्ते की कोई जानकारी नहीं थी। अब दोनों परिवार सामाजिक, मानसिक और भावनात्मक पीड़ा का सामना कर रहे हैं।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या संवाद की कमी, रिश्तों को लेकर डर और परिवार से सच छिपाने की प्रवृत्ति कभी-कभी ऐसी भयावह घटनाओं की वजह बन जाती है। यदि जांच एजेंसियों के दावे सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि कई गलत फैसलों की ऐसी श्रृंखला थी जिसने तीन परिवारों का भविष्य बदल दिया।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। अदालत में आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है और अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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