भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कंगना ने कथित तौर पर आंदोलनकारी युवाओं, खासकर छात्राओं को निशाने पर लेते हुए उन्हें “जनरेशन गटर” बताया। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
राजनीतिक टिप्पणीकार विजय विद्रोही ने अपने वीडियो संदेश में कंगना रनौत के बयान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “नारी शक्ति वंदन” जैसे अभियानों की बात करते हैं, तो उनकी ही पार्टी की सांसद द्वारा युवतियों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सरकार की सोच पर सवाल खड़े करता है।
विजय विद्रोही ने यह भी कहा कि जिन युवाओं को कंगना “जनरेशन गटर” कह रही हैं, उन्हीं से केंद्र सरकार के मंत्री कई दौर की बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये युवा इतने ही गलत हैं, तो सरकार उनके साथ संवाद क्यों करती रही।
अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना ने आंदोलनकारी छात्राओं को “कम पढ़ी-लिखी”, “भ्रष्ट”, “ड्रग्स लेने वाली” और “असंख्य यौन संबंध बनाने वाली” कहकर पूरे युवा वर्ग और महिलाओं का अपमान किया है। उनका कहना था कि किसी आंदोलन में शामिल होने वाली सभी छात्राओं के बारे में इस तरह का सामान्यीकरण करना अनुचित है।
विजय विद्रोही ने कंगना रनौत के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें उन्होंने अपने शुरुआती करियर के दौरान ड्रग्स से जुड़े अनुभवों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे में दूसरों पर इस प्रकार के आरोप लगाना उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में शामिल कई छात्र-छात्राएं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से जुड़े हैं और लोकतंत्र, संविधान तथा जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। उनके अनुसार, विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियां लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करती हैं।
विजय विद्रोही ने अंत में भाजपा से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि कंगना रनौत का बयान उनका व्यक्तिगत मत है या पार्टी का आधिकारिक रुख। उनका कहना था कि यदि यह व्यक्तिगत बयान है तो पार्टी को सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।











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