करीब साढ़े तीन दशक पहले कश्मीर में आतंकवाद के सबसे भयावह दौर के दौरान हुई नर्स सरला भट्ट की हत्या के मामले में आखिरकार जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। अगस्त 2025 में मामले की दोबारा जांच शुरू करने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 29 जून 2026 को श्रीनगर की विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
चार्जशीट में प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार, यासीन मलिक इस अपहरण और हत्या का मुख्य आरोपी है। अन्य आरोपियों में अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू, मोहम्मद यूसुफ सोफी और फरार आरोपी खुर्शीद अहमद शालकू शामिल हैं। इनमें से तीन आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि शालकू के पाकिस्तान में होने की आशंका जताई गई है।
क्या था सरला भट्ट हत्याकांड?
27 वर्षीय सरला भट्ट दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग की रहने वाली थीं और श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। 18 अप्रैल 1990 को कुछ हथियारबंद लोगों ने हॉस्टल से उनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया। अगले दिन उनका शव सड़क किनारे बरामद हुआ।
जांच के अनुसार, उनके शरीर पर गोलियों के निशान, गंभीर चोटों और यातना के संकेत थे। शव के पास एक पर्ची भी मिली थी, जिस पर लिखा था कि उन्हें “मुखबरी की सजा” दी गई है। यही पर्ची अब जांच का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है।
35 साल तक क्यों नहीं मिला न्याय?
हत्या के बाद पुलिस ने अज्ञात आतंकियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन शुरुआती वर्षों में जांच आगे नहीं बढ़ सकी। उस दौर में आतंकवाद से जुड़े कई मामलों की तरह यह केस भी वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
2017 में कश्मीरी पंडित संगठन Roots in Kashmir ने सुप्रीम कोर्ट में पुराने मामलों की दोबारा जांच की मांग की थी, लेकिन अदालत ने समय बीत जाने और सबूतों की कमी का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी। 2022 में पुनर्विचार याचिका भी स्वीकार नहीं की गई।
इसके बाद SIA ने पुराने आतंकी मामलों को दोबारा खोलना शुरू किया। पहले जज नीलकंठ गंजू हत्याकांड और फिर अगस्त 2025 में सरला भट्ट हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू की गई।
यासीन मलिक पर पहले से कई गंभीर मामले
यासीन मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्ष 2022 में उसने आतंकवाद से जुड़े मामलों, आतंकी फंडिंग और आपराधिक साजिश सहित कई आरोपों में दोष स्वीकार किया था। 2019 में उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
अब सरला भट्ट हत्याकांड की चार्जशीट ने उसके खिलाफ एक और गंभीर आपराधिक मुकदमे का रास्ता खोल दिया है।
पीड़ित परिवार अब भी संतुष्ट नहीं
सरला भट्ट के परिवार का कहना है कि न्याय मिलने में बहुत देर हो चुकी है। परिवार के सदस्यों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो कई सच्चाइयों से पर्दा उठ सकता था। उनके अनुसार, 35 साल बाद मिली कानूनी कार्रवाई उनके व्यक्तिगत दर्द को कम नहीं कर सकती।
न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
SIA ने इस चार्जशीट को जम्मू-कश्मीर में पुराने आतंकी अपराधों की जांच के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लंबित मामलों का प्रतीक है जिनमें आतंकवाद के पीड़ित परिवार दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सरला भट्ट हत्याकांड की यह चार्जशीट न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत भर है। अब अदालत में साक्ष्यों की जांच होगी और आरोपों पर सुनवाई चलेगी। अंतिम फैसला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।












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