नई दिल्ली: देश के बैंकिंग सिस्टम में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकारी बैंक (पीएसयू बैंक) अपने पुराने एटीएम नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में 15,000 से अधिक पारंपरिक एटीएम हटाए या अपग्रेड किए जाएंगे। उनकी जगह कैश रिसाइक्लिंग मशीनें (Cash Recycling Machines – CRM) लगाई जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाएं अधिक तेज, सुविधाजनक और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि जिन एटीएम को बदला जाएगा, उनमें लगभग 77 प्रतिशत सरकारी बैंकों के होंगे। इस अभियान में पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े सरकारी बैंक शामिल हैं। आने वाले समय में इन मशीनों को बदलने या अपग्रेड करने के लिए टेंडर जारी किए जा सकते हैं।
क्या होती है कैश रिसाइक्लिंग मशीन?
सामान्य एटीएम केवल नकदी निकालने की सुविधा देते हैं। इनमें कैश खत्म होने पर बैंक को दोबारा मशीन में नकदी भरनी पड़ती है।
वहीं, कैश रिसाइक्लिंग मशीन एक कदम आगे है। इसमें ग्राहक नकदी जमा भी कर सकता है और वही जमा किए गए नोट दूसरे ग्राहकों को निकासी के दौरान उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे बार-बार कैश भरने की जरूरत कम हो जाती है और मशीनें लंबे समय तक सुचारु रूप से चलती रहती हैं।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के वर्षों में खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में एटीएम में नकदी खत्म होने की शिकायतें बढ़ी हैं। कई मशीनें समय पर रिफिल नहीं हो पातीं, जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार, पुराने एटीएम के संचालन और उनमें बार-बार नकदी भरने पर काफी खर्च आता है। इसके अलावा मशीनों के लंबे समय तक बंद रहने की समस्या भी सामने आती रही है।
एटीएम संचालन अब विशेषज्ञ कंपनियों को सौंपेंगे बैंक
फिलहाल सरकारी बैंक अपने लगभग 90 हजार ऑन-साइट एटीएम का संचालन स्वयं करते हैं। अब बैंक इस जिम्मेदारी को चरणबद्ध तरीके से विशेषज्ञ कंपनियों को सौंपने की तैयारी में हैं।
इन कंपनियों की जिम्मेदारी होगी—
एटीएम में नकदी भरना
मशीनों का रखरखाव
सॉफ्टवेयर अपडेट
रियल-टाइम मॉनिटरिंग
तकनीकी खराबियों का त्वरित समाधान
आउटसोर्सिंग की चार बड़ी वजहें
बैंकों के इस फैसले के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—
आरबीआई की सलाह, ताकि बैंक अपने मुख्य बैंकिंग कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकें।
कर्मचारियों और संचालन पर बढ़ता खर्च।
नियमों और कंप्लायंस की बढ़ती लागत।
नई तकनीकों को अपनाने में बढ़ता निवेश।
भारत का एटीएम नेटवर्क लगातार बढ़ रहा
देश में एटीएम की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2018-19 में लगभग 2.41 लाख एटीएम थे, जो अब बढ़कर करीब 2.46 लाख हो चुके हैं।
साथ ही, आउटसोर्स किए गए एटीएम की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। सितंबर 2025 तक लगभग 1.20 लाख एटीएम तीसरी कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे थे। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या करीब 1.70 लाख तक पहुंच सकती है।
ग्राहकों को क्या होगा फायदा?
यदि यह योजना सफल रही, तो ग्राहकों को कई फायदे मिल सकते हैं—
एटीएम में कैश खत्म होने की समस्या कम होगी।
नकदी जमा और निकासी दोनों सुविधाएं एक ही मशीन से मिलेंगी।
मशीनों का डाउनटाइम घटेगा।
बैंकिंग सेवाएं पहले से अधिक तेज और भरोसेमंद होंगी।
बैंकों की परिचालन लागत में कमी आएगी।
निष्कर्ष
सरकारी बैंकों का यह कदम केवल एटीएम हटाने का नहीं, बल्कि पूरे एटीएम नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। आने वाले वर्षों में पारंपरिक एटीएम की जगह स्मार्ट कैश रिसाइक्लिंग मशीनें लेंगी, जिससे ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और बैंकिंग व्यवस्था अधिक कुशल और तकनीक-सक्षम बन सकेगी।












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