नई दिल्ली: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol) को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एआई-जनित वीडियो और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर उनकी याचिका ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है।
सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ कोर्ट पहुंचे गडकरी
मामले की शुरुआत जुलाई 2026 में हुई, जब भाजपा के नागपुर सोशल मीडिया सेल के एक पदाधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर एआई की मदद से ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें नितिन गडकरी को एथेनॉल मिश्रण नीति का प्रमुख जिम्मेदार बताते हुए उन पर व्यक्तिगत आर्थिक लाभ लेने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
इसके बाद नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने अदालत से कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस नीति का प्रत्यक्ष प्रशासनिक संबंध उनके मंत्रालय से नहीं है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
27 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय अहूजा ने कहा कि यदि गडकरी चाहें तो कथित फर्जी वीडियो प्रसारित करने के मामले में Meta, X और Google जैसी डिजिटल कंपनियों के खिलाफ दीवानी मुकदमा भी दायर कर सकते हैं।
पुराने बयान से उठे सवाल
हालांकि, गडकरी की अदालत में दी गई दलील के बाद सोशल मीडिया पर उनके ही एक पुराने सार्वजनिक बयान की चर्चा तेज हो गई है।
13 जून 2026 को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि उन्होंने 100 प्रतिशत एथेनॉल (Flex Fuel) से चलने वाले वाहनों के लिए आवश्यक नियमों से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं। कार्यक्रम में उन्होंने यह भी बताया था कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर Maruti Suzuki की फ्लेक्स-फ्यूल WagonR और Hero MotoCorp की कुछ मोटरसाइकिलों के लॉन्च में उन्होंने भाग लिया था।
इस पुराने बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि एथेनॉल नीति उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, तो फिर वे इस पहल का सार्वजनिक रूप से उल्लेख और समर्थन क्यों करते रहे।
सरकार की नीति क्या है?
केंद्र सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वाहन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
हालांकि, एथेनॉल मिश्रण को लेकर वाहन प्रदर्शन, इंजन की अनुकूलता और उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है।
फिलहाल विवाद का केंद्र
विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि एक ओर गडकरी अदालत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके पुराने सार्वजनिक बयान सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जिनमें वे फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की पहल में अपनी सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते दिखाई देते हैं। ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।











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