“लता मंगेशकर मेरी गुरु थीं, उन्होंने मुझे कभी नहीं रोका” – अनुराधा पौडवाल ने वर्षों पुराने विवादों पर तोड़ी चुप्पी

हिंदी फिल्म संगीत की मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने संगीत सफर, लता मंगेशकर से रिश्ते और वर्षों से चले आ रहे विवादों पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने हमेशा लता मंगेशकर को अपना गुरु माना है और यह कहना कि लता जी ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका, पूरी तरह गलत और निराधार है।

“मैंने लता जी को सुनकर सीखा”

अनुराधा पौडवाल ने बताया कि बचपन से ही उन्हें गायन का बेहद शौक था। उन्होंने किसी औपचारिक गुरु से प्रशिक्षण लेने के बजाय लता मंगेशकर की रिकॉर्डिंग सुन-सुनकर खुद को तैयार किया।

उन्होंने कहा कि वह रोज़ लता जी द्वारा गाई गई भगवद्गीता का अभ्यास करती थीं। लगातार रियाज़ करने से उन्हें संस्कृत उच्चारण, सुरों की शुद्धता और शब्दों के ठहराव को समझने में काफी मदद मिली।

अनुराधा ने कहा, “मैं लता जी को हमेशा अपना गुरु मानती हूं। मैंने उनसे प्रत्यक्ष शिक्षा नहीं ली, लेकिन उन्हें सुनकर ही सीखा।”

“गुरु से बराबरी नहीं होती”

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे उन पुराने आरोपों के बारे में पूछा गया कि लता मंगेशकर ने उन्हें इंडस्ट्री में आगे बढ़ने नहीं दिया, तो अनुराधा ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, “गुरु से कभी बराबरी नहीं की जाती। गुरु पूजनीय होते हैं। मैंने उनसे जितना सीख सकती थी, उतना सीखने की कोशिश की। उनकी तुलना करना या यह कहना कि उन्होंने किसी को रोका, मुझे बिल्कुल सही नहीं लगता।”

उनके अनुसार, लोगों की तुलना करने की प्रवृत्ति और सनसनीखेज कहानियां अक्सर वास्तविकता से दूर होती हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और यूट्यूब पर इस तरह के विषय इसलिए लोकप्रिय हो जाते हैं क्योंकि वे लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे सच भी हों।

“इतनी ऊंचाई पर बैठे कलाकारों को किसी से डरने की जरूरत नहीं होती”

अनुराधा पौडवाल का मानना है कि लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान कलाकारों की उपलब्धियां इतनी बड़ी थीं कि उन्हें किसी नए गायक या गायिका से प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत ही नहीं थी।

उन्होंने कहा, “जिस बुलंदी पर उनका कला स्तर था, वहां किसी को रोकने की बात करना ही मुझे तर्कसंगत नहीं लगता।”

कैसे मिला फिल्मों में पहला बड़ा मौका

अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार ऑल इंडिया रेडियो के लिए उन्होंने एक ऐसा गीत रिकॉर्ड किया, जिसे सुनकर कई बड़े संगीतकारों ने फोन कर पूछा कि यह आवाज किसकी है।

इसके बाद उन्हें फिल्मों में गाने के प्रस्ताव मिलने लगे। हालांकि शुरुआत में उनका फिल्मों में करियर बनाने का कोई इरादा नहीं था।

उन्होंने बताया कि फिल्म ‘अभिमान’ की रिकॉर्डिंग के दौरान एक छोटा-सा संस्कृत श्लोक मूल रूप से लता मंगेशकर से गवाया जाना था। लेकिन संगीतकारों ने उनकी आवाज सुनने के बाद वही श्लोक उनसे रिकॉर्ड कराने का फैसला किया। यही मौका उनके फिल्मी करियर का अहम मोड़ साबित हुआ।

अरुण पौडवाल की सख्ती ने निखारी प्रतिभा

अनुराधा ने अपने पति और संगीतकार अरुण पौडवाल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अरुण पौडवाल बेहद अनुशासित और पेशेवर संगीतकार थे। वह मानते थे कि बिना पूरी तैयारी के किसी को पेशेवर गायन में नहीं उतरना चाहिए। इसी कारण उन्होंने अनुराधा को भी लंबे समय तक कड़ी मेहनत और अभ्यास कराया।

कैसे बनीं कैसेट युग की सबसे लोकप्रिय आवाज

बातचीत के दौरान अनुराधा पौडवाल ने स्वीकार किया कि उनके करियर में बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी तस्वीरें ऑडियो कैसेट्स के कवर पर छपने लगीं। उन्होंने इसका श्रेय टी-सीरीज़ के संस्थापक गुलशन कुमार को दिया, जिन्होंने गायकों को भी स्टार पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुराने विवादों पर लगाया विराम

अनुराधा पौडवाल के इस इंटरव्यू के बाद एक बार फिर उन वर्षों पुराने विवादों पर चर्चा शुरू हो गई है, जिनमें अक्सर यह दावा किया जाता था कि लता मंगेशकर ने नई गायिकाओं के लिए रास्ते बंद किए। हालांकि अनुराधा पौडवाल ने स्वयं इन दावों को नकारते हुए स्पष्ट किया कि उनके लिए लता मंगेशकर हमेशा प्रेरणा, सम्मान और गुरु का स्थान रखती हैं।

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