असम की राजनीति में एक दशक पहले जिस नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार को घेरा था, वही नेता आज भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। 23 अगस्त 2015 को नई दिल्ली में अमित शाह के आवास पर भाजपा की सदस्यता लेने वाले हेमंता विश्व शर्मा अब लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने असम में प्रचंड बढ़त हासिल की है। विपक्ष 30 सीटों के नीचे सिमटता दिखाई दे रहा है। लेकिन इस जीत का मतलब सिर्फ असम की सत्ता में वापसी नहीं है। यह जीत एक बड़े सवाल को जन्म देती है — क्या हेमंता विश्व शर्मा अब सिर्फ असम या पूर्वोत्तर के नेता रहेंगे या आने वाले वर्षों में भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाएंगे?
छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक
1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में जन्मे हेमंता विश्व शर्मा ने गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से पढ़ाई की और वहीं से छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। असम आंदोलन के दौर में राजनीति में कदम रखने वाले हेमंता ने जल्दी ही खुद को एक तेज-तर्रार संगठनकर्ता के रूप में स्थापित कर लिया।
1996 में पहला चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2001 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीतना उनकी राजनीतिक पकड़ को दिखाता है। कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता की छवि बनाई।
कांग्रेस छोड़ने का फैसला और भाजपा में नई शुरुआत
कांग्रेस में हेमंता विश्व शर्मा को कभी तरुण गोगोई का करीबी माना जाता था। लेकिन समय के साथ यह साफ होने लगा कि असम की सत्ता में अगली पीढ़ी के नेतृत्व के तौर पर गौरव गोगोई को आगे बढ़ाया जा रहा है। यही वह मोड़ था जहां हेमंता की महत्वाकांक्षा और कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के रास्ते अलग हो गए।
2014 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी उभर रही थी। इसी दौरान जुलाई 2014 में हेमंता ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और अगस्त 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। यह सिर्फ एक पार्टी परिवर्तन नहीं था, बल्कि पूर्वोत्तर की राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत थी।
“नॉर्थ ईस्ट के अमित शाह” की पहचान
भाजपा ने 2016 में हेमंता विश्व शर्मा को नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया। इसके बाद असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन की सरकारें बनने लगीं।
पूर्वोत्तर में भाजपा के विस्तार का सबसे बड़ा चेहरा हेमंता ही बने। चुनावी रणनीति बनाना, गठबंधन तैयार करना और विरोधियों को मात देना उनकी खास पहचान बन गई। यही वजह रही कि राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें “नॉर्थ ईस्ट का अमित शाह” कहना शुरू किया।
2021 के बाद बदली राष्ट्रीय भूमिका
2021 में भाजपा की जीत के बाद सर्वानंद सोनोवाल की जगह हेमंता विश्व शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद उनकी भूमिका सिर्फ असम तक सीमित नहीं रही।
झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक और चुनावी रणनीतिकार के तौर पर इस्तेमाल किया। उनकी भाषण शैली, आक्रामक राजनीतिक रुख और चुनावी मैनेजमेंट क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
हिंदुत्व की राजनीति और संघ से नजदीकी
हेमंता विश्व शर्मा की सबसे बड़ी चुनौती यह मानी जाती रही कि उनका राजनीतिक बैकग्राउंड संघ परिवार से नहीं रहा। वे कांग्रेस से आए नेता थे और कभी भाजपा व नरेंद्र मोदी के आलोचक भी रहे।
लेकिन भाजपा में आने के बाद उन्होंने खुद को तेजी से बदला। मदरसों के खिलाफ कार्रवाई, एंटी-एनक्रोचमेंट अभियान, डेमोग्राफी और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाकर उन्होंने खुद को भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति के अनुरूप स्थापित किया।
संघ के साथ उनकी बढ़ती निकटता और अमित शाह से मजबूत संबंधों ने उन्हें भाजपा के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में शामिल कर दिया है।
क्या दिल्ली की राजनीति में होगा अगला कदम?
आज भाजपा में अगली पीढ़ी के नेताओं की चर्चा होती है तो योगी आदित्यनाथ, देवेंद्र फडणवीस और हेमंता विश्व शर्मा जैसे नाम सामने आते हैं। इन तीनों नेताओं के पास प्रशासनिक अनुभव, संगठन क्षमता और राजनीतिक संसाधन हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हेमंता को भाजपा संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि फिलहाल वे असम में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं और पार्टी उन्हें जल्द दिल्ली भेजने का जोखिम शायद नहीं उठाएगी।
महत्वाकांक्षा जिसे उन्होंने कभी छुपाया नहीं
हेमंता विश्व शर्मा की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू उनकी स्पष्ट महत्वाकांक्षा है। कहा जाता है कि उन्होंने 19 साल की उम्र में ही अपनी पत्नी से कह दिया था कि वह एक दिन असम के मुख्यमंत्री बनेंगे — और तीन दशक बाद उन्होंने यह सपना पूरा भी कर दिखाया।
अब सवाल यह है कि उनका अगला लक्ष्य क्या है?
क्या वे भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव प्रबंधक बनेंगे?
क्या वे भविष्य में केंद्रीय गृह मंत्री जैसी भूमिका निभाएंगे?
या फिर भाजपा उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व की अगली पंक्ति में तैयार कर रही है?
इन सवालों के जवाब अभी भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि हेमंता विश्व शर्मा अब सिर्फ असम के नेता नहीं रहे। वे भाजपा की उस नई पीढ़ी का हिस्सा बन चुके हैं, जो आने वाले दशक की राष्ट्रीय राजनीति को आकार दे सकती है।






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