क्या अडानी ग्रुप शुरू करेगा अपनी एयरलाइन? 20 साल पुरानी शर्त हटाने की मांग से तेज हुई चर्चा

नई दिल्ली: भारत के विमानन क्षेत्र में एक नई बहस छिड़ गई है। देश का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर Adani Airport Holdings एयरपोर्ट संचालन से जुड़ी 20 साल पुरानी एक शर्त हटाने की मांग कर रहा है। इस मांग के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अडानी ग्रुप भविष्य में अपनी एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, समूह ने सार्वजनिक रूप से एयरलाइन कारोबार में उतरने की खबरों का खंडन किया है। इसके बावजूद जून 2026 में Airports Authority of India (AAI) को भेजे गए एक पत्र के सामने आने से इस पूरे मामले ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

क्या है 20 साल पुरानी शर्त?

साल 2006 में जब दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट का निजीकरण किया गया था, तब सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी थी। इसके अनुसार, एयरपोर्ट संचालित करने वाली कोई भी कंपनी किसी Scheduled Airline में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकती।

इस शर्त का उद्देश्य हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकना था। आशंका यह थी कि यदि कोई कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन—दोनों का संचालन करेगी, तो वह अपनी एयरलाइन को बेहतर स्लॉट, शुल्क में रियायत या अन्य व्यावसायिक लाभ दे सकती है, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।

अडानी की चिट्ठी में क्या कहा गया?

The Economic Times की 25 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में Adani Airport Holdings के CEO अरुण बंसल ने AAI को पत्र लिखकर इस शर्त को हटाने का अनुरोध किया।

पत्र में कहा गया कि कंपनी “Next Generation Airlines” के विकास के लिए विशिष्ट स्थिति (Uniquely Positioned) में है और भविष्य के एयरपोर्ट अनुबंधों में भी ऐसी शर्त नहीं रखी जानी चाहिए।

फिर कंपनी ने इनकार क्यों किया?

23 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने रिपोर्ट प्रकाशित की कि अडानी समूह एयरलाइन कारोबार में प्रवेश करने की संभावनाएं तलाश रहा है।

लेकिन अगले ही दिन, 24 जुलाई को Adani Enterprises ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजी गई आधिकारिक सूचना में कहा कि एयरलाइन शुरू करने की खबरें “पूरी तरह निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत” हैं तथा कंपनी फिलहाल ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही।

यही कारण है कि जून में लिखे गए पत्र और जुलाई में जारी आधिकारिक बयान के बीच अंतर को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

अडानी समूह की एविएशन में मौजूदगी

वर्तमान में अडानी समूह भारत का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है। समूह के पास:

– मुंबई एयरपोर्ट
– नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
– अहमदाबाद
– जयपुर
– लखनऊ
– गुवाहाटी
– मंगलुरु
– तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट

इसके अलावा समूह विमान मरम्मत (MRO), पायलट प्रशिक्षण और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी निवेश कर चुका है। ब्राज़ील की विमान निर्माता Embraer के साथ भी क्षेत्रीय विमानन सहयोग को लेकर समझौता किया गया है।

इंडिगो ने क्या कहा?

IndiGo के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने इस मुद्दे पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि कोई कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों संचालित करेगी तो हितों के टकराव की आशंका बढ़ सकती है। उनके अनुसार इससे स्लॉट आवंटन, शुल्क निर्धारण और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है, जिसका नुकसान अंततः यात्रियों को भी उठाना पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं एयरपोर्ट स्लॉट?

एयरपोर्ट स्लॉट वह निर्धारित समय होता है, जब किसी विमान को उड़ान भरने या उतरने की अनुमति मिलती है। दिल्ली और विशेष रूप से मुंबई जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर सुबह और शाम के स्लॉट सबसे अधिक मूल्यवान माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एयरपोर्ट संचालक की अपनी एयरलाइन भी होगी, तो निष्पक्ष स्लॉट आवंटन और व्यावसायिक गोपनीयता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है और यह केवल संभावित स्थिति पर आधारित चर्चा है।

क्या भारत को तीसरी बड़ी एयरलाइन की जरूरत है?

भारत का घरेलू विमानन बाजार आज मुख्य रूप से दो बड़ी कंपनियों—IndiGo और Air India Group—के बीच केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एक मजबूत तीसरे खिलाड़ी की जरूरत हो सकती है।

दूसरी ओर, उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि यदि एयरपोर्ट और एयरलाइन का स्वामित्व एक ही समूह के पास होगा, तो इसके लिए बेहद मजबूत नियामकीय सुरक्षा (Regulatory Safeguards) और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी होगी।

फिलहाल स्थिति क्या है?

अब तक न तो 10 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली शर्त में कोई बदलाव किया गया है और न ही अडानी समूह ने किसी एयरलाइन के अधिग्रहण या नई एयरलाइन शुरू करने की आधिकारिक घोषणा की है।

फिलहाल यह मामला नीति स्तर पर चर्चा और संभावनाओं तक सीमित है। यदि भविष्य में सरकार इस शर्त में संशोधन करती है, तो भारतीय विमानन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा, निवेश और कारोबारी संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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