नई दिल्ली। भारत की साबरमती जेल से लेकर कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया और अमेरिका के कैलिफोर्निया तक फैली एक कथित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक साजिश ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) और एफबीआई द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों तथा कनाडा की पुलिस के हालिया बयान ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और उससे जुड़े घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
अमेरिकी एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत भारत, कनाडा, अमेरिका और यूरोप में सक्रिय तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। वहीं दूसरी ओर कनाडा की पुलिस ने कहा है कि अब तक की जांच में निज्जर हत्याकांड में भारत सरकार के अधिकारियों की संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। इन दोनों घटनाक्रमों ने पिछले तीन वर्षों से चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस को नई दिशा दे दी है।
ऑपरेशन हार्डबॉल: 37 आरोपियों पर कार्रवाई
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, ऑपरेशन हार्डबॉल के तहत कुल 37 लोगों के खिलाफ हत्या, फिरौती, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि शेष की तलाश जारी है।
एफबीआई के अनुसार, इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में कोकीन, हेरोइन, नकदी और अवैध हथियार भी बरामद किए गए। एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क कई देशों में संगठित अपराधों को अंजाम दे रहा था।
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर गंभीर आरोप
चार्जशीट में सबसे प्रमुख नाम लॉरेंस बिश्नोई का है, जो फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि जेल के भीतर से अवैध मोबाइल फोन के जरिए उसने विदेशों में सक्रिय अपने नेटवर्क को निर्देश दिए।
एफबीआई ने उसके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ को उत्तर अमेरिका में इस नेटवर्क का प्रमुख बताया है। एजेंसी के अनुसार, बराड़ के कनाडा, अमेरिका, भारत और मेक्सिको तक संपर्क फैले हुए हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया गया है।
चार्जशीट में रोहित गोदारा और सुखराज सिंह कंग समेत अन्य आरोपियों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर यूरोप और अन्य क्षेत्रों में नेटवर्क संचालित करने वाला बताया गया है।
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से भी जुड़ा नाम
गोल्डी बराड़ का नाम इससे पहले पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 2022 में हुई हत्या के मामले में भी सामने आ चुका है। भारतीय जांच एजेंसियां पहले ही उसके कथित संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से होने का दावा कर चुकी हैं। भारत सरकार उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित कर चुकी है तथा उसके विरुद्ध इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है।
भारतीय एजेंसियों के सहयोग का दावा
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने पिछले कुछ महीनों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और उनके सहयोगियों के संबंध में विस्तृत सूचनाएं साझा कीं और अतिरिक्त जानकारी भी प्राप्त की।
बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़-दो वर्षों में भारतीय एजेंसियां इन नेटवर्क से जुड़े कई इनपुट विदेशी एजेंसियों के साथ साझा करती रही थीं।
निज्जर हत्याकांड में कनाडा का बदला रुख
ऑपरेशन हार्डबॉल के समानांतर कनाडा से आया एक बयान भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा है कि अब तक की जांच में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारियों की संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है।
यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि इस हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित भूमिका हो सकती है। भारत ने उस समय इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बताया था।
ट्रूडो के आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव आया था और दोनों पक्षों ने राजनयिक स्तर पर भी कई कड़े कदम उठाए थे।
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की नई शुरुआत
विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार देखने को मिला है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद भारत और कनाडा के बीच उच्चस्तरीय बैठकों का दौर शुरू हुआ। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी पहल की है।
ऐसे समय में आरसीएमपी का यह बयान कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
पंजाब पुलिस अधिकारी का नाम भी चार्जशीट में
ऑपरेशन हार्डबॉल के दस्तावेजों में पंजाब पुलिस के एक अधिकारी का नाम भी सामने आया है। एफबीआई के आरोपों के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर विदेश में बैठे गैंगस्टरों के कहने पर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे धन उगाही करने की कोशिश की।
आरोप सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया है तथा विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी ने स्वयं पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनका नाम अमेरिकी दस्तावेजों में कैसे आया।
वैश्विक संगठित अपराध का नया चेहरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक गैंग या एक हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों की ओर संकेत करता है जो विभिन्न देशों में बैठकर फिरौती, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या और अन्य संगठित अपराधों का संचालन करते हैं।
यदि अमेरिकी एजेंसियों के आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह मामला दिखाता है कि आधुनिक संगठित अपराध अब सीमाओं से परे संचालित होता है, जहां जेल में बंद सरगना भी डिजिटल माध्यमों से कई देशों में फैले नेटवर्क को नियंत्रित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
ऑपरेशन हार्डबॉल ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के एक जटिल नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं निज्जर हत्याकांड को लेकर कनाडा की पुलिस के ताजा बयान ने भारत-कनाडा संबंधों से जुड़े उस विवाद को भी नई दिशा दी है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया था।
हालांकि, इस पूरे मामले में कई आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष अदालतों और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यह मामला केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय की बड़ी परीक्षा बन चुका है।




Leave a Reply