लंबे समय से अभिनेता गोविंदा अपने काम से ज़्यादा पारिवारिक बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहे हैं। कभी उनके भांजे कृष्णा अभिषेक, तो कभी उनकी पत्नी सुनीता—मीडिया में किसी न किसी रूप में गोविंदा का ज़िक्र होता रहा। इन बयानों ने न सिर्फ़ उनके निजी जीवन को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया, बल्कि उनके व्यक्तित्व और करियर पर भी सवाल खड़े किए।
अब जब गोविंदा ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने बेहद धैर्य, समझदारी और संतुलन के साथ प्रतिक्रिया दी है। जिस तरह से उन्होंने अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोया, उसमें न कोई कटुता है, न आक्रोश—बल्कि एक अनुभवी इंसान का दर्द और संयम झलकता है।
गोविंदा का कहना है कि बार-बार उनके ही अपने लोगों से उनके खिलाफ बातें कहलवाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कृष्णा एक शो में नियमित रूप से काम कर रहे थे, तब शो के लेखक उनके नाम पर जोक्स लिखते थे और वही जोक्स कृष्णा से कहलवाए जाते थे। गोविंदा ने समय रहते कृष्णा को समझाया कि उन्हें उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआत में यह बात कृष्णा को समझ नहीं आई, लेकिन समय के साथ उन्होंने स्थिति को समझा और राइटर्स को निर्देश दिया कि गोविंदा के नाम पर मज़ाक न लिखे जाएँ। यही कारण है कि आज कपिल शर्मा शो या अन्य कार्यक्रमों में कृष्णा गोविंदा से जुड़े मज़ाक करते नज़र नहीं आते।
जहाँ एक तरफ़ यह अध्याय शांत हुआ, वहीं दूसरी ओर पत्नी सुनीता के बयान चर्चा में आने लगे। इस पर भी गोविंदा का रवैया बेहद शांत और गरिमामय रहा। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है और लगातार उनके बारे में सार्वजनिक रूप से बोलना उन्हें अंदर से घुटन देता है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से अपने परिवार से विनम्र निवेदन किया कि इतना न बोलें कि उनका दम घुटने लगे।
गोविंदा ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें खुद समझ नहीं आता कि परिवार में कब नाराज़गी आ जाती है और कब सब कुछ सामान्य हो जाता है। उनका यह बयान शायद कृष्णा और सुनीता के बीच रही तनातनी की ओर इशारा करता है, जो अब समाप्त हो चुकी है।
एक अहम बात यह भी रही कि गोविंदा ने अपने बच्चों को लेकर किसी तरह की सिफ़ारिश करने से साफ़ इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा करियर अपने दम पर बनाया है और वही सिद्धांत वे अपने बच्चों के लिए भी मानते हैं। न किसी निर्माता से सिफ़ारिश, न किसी निर्देशक से दबाव—वे अपनी औकात और मेहनत में विश्वास रखते हैं।
गोविंदा का यह बयान सिर्फ़ एक सफ़ाई नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व का आईना है। आज सोशल मीडिया पर भी लोग यही कह रहे हैं कि जिस शख़्स ने दशकों की मेहनत से अपना मुक़ाम बनाया, उसके परिवार को अब संयम बरतना चाहिए। हर सफल इंसान की सबसे बड़ी परीक्षा शायद यही होती है—जब अपने ही लोग अनजाने में सबसे बड़ा शोर बन जाते हैं।
गोविंदा ने यह साबित किया है कि असली क्लास शोर में नहीं, बल्कि खामोशी और संतुलन में होती है।
गोविंदा की हो रही है तारीफ












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