✍️ धीरज मिश्रा
आज के दौर में जब एक्शन-थ्रिलर फिल्मों में अक्सर सिर्फ शोर और स्टाइल ही देखने को मिलता है, “धुरंधर: द रिवेंज” एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आती है जो अपनी कहानी, किरदारों और ट्रीटमेंट के जरिए खुद को थोड़ा अलग साबित करने की कोशिश करती है। यह फिल्म अपने पहले भाग की तुलना में ज्यादा संतुलित, सशक्त और प्रभावी नजर आती है।
फिल्म की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है, जहां पिछला हिस्सा खत्म हुआ था। इस बार कहानी सिर्फ एक मिशन या बदले तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किरदारों की मानसिक स्थिति, उनके फैसलों और उनके अतीत को भी गहराई से दिखाने की कोशिश करती है। निर्देशक आदित्य धर ने इस बार नरेशन को ज्यादा टाइट रखने की कोशिश की है, हालांकि फिल्म की लंबाई कहीं-कहीं इसकी गति को प्रभावित करती है।
रणवीर सिंह फिल्म की जान हैं। वह जसकिरत/हमज़ा के किरदार में पूरी तरह डूबे हुए नजर आते हैं। एक साधारण, कमजोर और संवेदनशील इंसान से लेकर एक खतरनाक, जुनूनी और दृढ़ किरदार में उनका ट्रांसफॉर्मेशन बेहद प्रभावशाली है। उनकी आंखों में दिखने वाला गुस्सा, दर्द और बदले की आग दर्शकों को बांधकर रखती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह फिल्म काफी हद तक उनके कंधों पर टिकी हुई है।
संजय दत्त अपने किरदार में मजबूती और गंभीरता लाते हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस कम समय में भी असर छोड़ता है। बाकी सहायक कलाकार भी अपनी-अपनी जगह ठीक काम करते हैं और कहानी को सपोर्ट करते हैं।
फिल्म का बैकड्रॉप—अंडरवर्ल्ड, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय साजिशों का मिश्रण—कहानी को एक बड़ा कैनवास देता है। हालांकि कुछ हिस्सों में यह सब थोड़ा ज्यादा नाटकीय और अविश्वसनीय लगता है, लेकिन फिल्म की तेज रफ्तार और ट्रीटमेंट इसे संभाल लेते हैं। फिल्म कहीं-कहीं वास्तविक घटनाओं से प्रेरित लगती है, जो इसे और दिलचस्प बनाती है।
एक्शन सीक्वेंस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत हैं। ये सिर्फ बड़े और स्टाइलिश नहीं हैं, बल्कि कई जगहों पर बेहद रॉ और इंटेंस भी हैं। कुछ सीन इतने ग्राफिक और हिंसक हैं कि वे हर दर्शक के लिए सहज नहीं हो सकते, लेकिन इसी वजह से फिल्म का टोन और ज्यादा डार्क और रियलिस्टिक बनता है।
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के साथ तालमेल बैठाता है और कई सीन को और ज्यादा प्रभावशाली बना देता है। सिनेमैटोग्राफी भी काबिले-तारीफ है, खासकर नाइट सीक्वेंस और एक्शन ब्लॉक्स में विजुअल्स काफी प्रभाव छोड़ते हैं।
कमजोरियों की बात करें तो फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा महसूस होती है। कुछ सीन ऐसे हैं जिन्हें छोटा किया जा सकता था, जिससे फिल्म और ज्यादा क्रिस्प बन सकती थी। इसके अलावा, कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा जटिल और ओवरड्रामेटिक लगती है।
कुल मिलाकर, “धुरंधर: द रिवेंज” एक ऐसी फिल्म है जो अपने पहले भाग से एक कदम आगे बढ़ती है। इसमें दमदार परफॉर्मेंस, इंटेंस एक्शन और एक दिलचस्प कहानी है, जो दर्शकों को बांधे रखने की क्षमता रखती है। अगर आप एक्शन और थ्रिलर के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा सिनेमैटिक अनुभव साबित हो सकती है।
👉 रेटिंग: 3.5/5 ⭐⭐⭐










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