हॉमी अडजानिया की ‘कॉकटेल 2’ देखने के बाद सबसे पहला एहसास यही होता है कि फिल्म देखने में जितनी आकर्षक है, भीतर से उतनी ही खाली। सिसिली (इटली) के मनमोहक दृश्य, डिज़ाइनर परिधान और सितारों की चमक फिल्म को एक शानदार ट्रैवल-वीडियो जैसा रूप देते हैं, लेकिन जब बात कहानी की आती है, तो यह चमक जल्द ही फीकी पड़ने लगती है।
फिल्म की कहानी एक ऐसे प्रेम-त्रिकोण पर आधारित है, जिसकी नींव ही अविश्वास और एक अजीब-सी “चुनौती” पर रखी गई है। एक युवती अपनी सहेली से अपने प्रेमी को रिझाने के लिए कहती है, ताकि वह उसके प्रेम की परीक्षा ले सके। यही विचार पूरी फिल्म का आधार बनता है, लेकिन दर्शकों के लिए इसे गंभीरता से लेना कठिन हो जाता है।
शाहिद कपूर पूरे फिल्म में बेहद संयमित और शांत दिखाई देते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है कि कहानी उनके इर्द-गिर्द घूम ही नहीं रही। रश्मिका मंदाना अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मौजूद हैं, जबकि कृति सेनन को फिल्म में सबसे अधिक स्क्रीन स्पेस और ग्लैमर मिला है। कई दृश्यों में ऐसा महसूस होता है मानो फिल्म का उद्देश्य कहानी कहने से अधिक कृति सेनन और सिसिली की खूबसूरती को प्रदर्शित करना हो।
फिल्म का पहला हिस्सा सोशल मीडिया की उन रील्स जैसा लगता है जो युवाओं को विदेश घूमने के सपने दिखाती हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पात्रों के निर्णय और उनके व्यवहार वास्तविकता से दूर और थके हुए लगने लगते हैं।
‘कॉकटेल 2’ में रिश्तों, भरोसे और आधुनिक प्रेम पर बात करने की कोशिश की गई है, लेकिन पटकथा इन विषयों की गहराई तक पहुँचने में असफल रहती है। नतीजा यह होता है कि दर्शक किसी भी किरदार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं पाते।
निष्कर्ष:
अगर आप शानदार लोकेशन, फैशन और सितारों की मौजूदगी के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘कॉकटेल 2’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन यदि आप एक मजबूत प्रेम कहानी, यादगार किरदार और भावनात्मक गहराई की उम्मीद लेकर सिनेमाघर जा रहे हैं, तो यह कॉकटेल शायद आपके स्वाद का न हो।
रेटिंग: 2.5/5 ⭐⭐½
“ग्लैमर का नशा तो है, लेकिन कहानी का स्वाद अधूरा रह जाता है।”











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