मोहन भागवत देश के ‘राष्ट्रपिता’ और ‘राष्ट्र-ऋषि’ हैं : इमाम उमर अहमद इलियासी

राहुल गाँधी इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा पर है इससे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को नए तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया है भले ही वो कितना भी कहे राहुल गाँधी पप्पू है कांग्रेस ख़त्म हो गयी है लेकिन वो अच्छी तरह जानती है की बीजेपी के बाद कांग्रेस की एकमात्र पार्टी है जो उनके लिए खतरा है इसी से वो हमेशा कांग्रेस की गतिविधियों पर नज़र रखती है और लगातार उस पर हमलावर रहती है आखिर जब वो बार बार कहती है की अब कांग्रेस ख़त्म हो चुकी है राहुल गाँधी पप्पू है तो उसकी यात्रा से इतनी विचलित क्यों है ,एक बार इस यात्रा से राहुल और कांग्रेस की चर्चा होने लगी इतना की मोहन भागवत को मस्जिद तक में जाना पद रहा है खैर हम आते है मुख्य बिंदु पर पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार नई दिल्ली की एक मस्जिद में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइज़ेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी से मुलाक़ात की थी, I
इसी मुलाक़ात में इलियासी ने मोहन भागवत को ‘राष्ट्रपिता’ और ‘राष्ट्र-ऋषि’ कहा था ।

मोहन भागवत के लिए इलियासी के इस विशेषण को लेकर विवाद हो गया कई जानी-मानी हस्तियों ने इलियासी की आलोचना की और कहा कि उन्होंने मोहन भागवत की तुलना महात्मा गांधी से कर दी ।
हैदराबाद हाउस से, जहाँ विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से भारत के पीएम मिलते हैं, वहाँ से कुछ सौ क़दम के फ़ासले पर मौजूद मस्जिद में गुरुवार को आरएसएस प्रमुख का आगमन हुआ था
इसके बाद इमाम उमर इलियासी ने बयान दिया कि “मोहन भागवत वहाँ उनके निमंत्रण पर आए थे. वो राष्ट्रपिता और राष्ट्र-ऋषि हैं, उनके आने से बेहतर संदेश जाएगा.”

हालाँकि इमाम उमर इलियासी ने बाद में एक मिडिया संस्थान से कहा कि उनका इरादा ‘महात्मा गांधी से मोहन भागवत की तुलना करना नहीं था’ और राष्ट्रपिता शब्द का प्रयोग ‘दोनों व्यक्तियों के राष्ट्र के प्रति समर्पण’ के संदर्भ में था ।

इस बयान के बाद लोग ये जानने के लिए उत्सुक है की मोहन भागवत को ये उपाधि देने वाले कौन है ।

इमाम उमर इलियासी दिल्ली से सटे मेवात से राजनीतिक पहुँच रखनेवाले मौलाना जमील इलियासी के पुत्र हैं और उनका परिवार दिल्ली के कस्तूरबा गांधी रोड पर स्थित गोलाकार मस्जिद की इमारत का फ़र्ज़ पिछली दो पीढ़ियों से निभा रहा है । साथ ही वह ‘पाँच लाख इमामों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइज़ेशन के चीफ़ इमाम’ भी हैं ।

बयान पर विवाद बढ़ने पर इमाम उमर कहते हैं गुरुवार के दिन हुई बैठक भी ‘दो दिलों का मिलन’ ही था.
हालांकि आलोचक कह रहे हैं कि खेल मोहब्बत का नहीं बल्कि हित साधने का है ।

इस बयान पर अब उनकी तीखी आलोचना शुरू हो गयी है , दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन ज़फ़रुल इस्लाम ख़ान उन्हें ‘सत्ता (इक़तदार) और कुर्सी के पुजारी’ बताते हैं जिन्होंने वक़्फ़ के भीतर आनेवाली मस्जिद पर क़ब्ज़ा कर अपना घर और दफ़्तर बना रखा है ।

डेढ़-दो साल पहले दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अमानतुल्लाह ख़ान दल-बल के साथ गोल मस्जिद पहुंच गए थे और उसे ख़ाली करवाना चाहते थे, जिसके बाद दोनों ओर से हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे लेकिन किसी तरह बीचबचाव से मामले में सुलह हो पाई ।

उमर इलियासी ख़ुद पर लग रहे इन आरोपों पर कहते हैं कि “हर आदमी का अपना नज़रिया होता है, हम क्या कर रहे हैं ये अहम है. आरएसएस प्रमुख से मिलने का विरोध वो ही कर रहे हैं जो चाहते हैं कि मुल्क के अंदर नफ़रत बनी रहे.”
इमाम इलियासी के गुरुवार के बयान पर प्रतिक्रियाएं जारी हैं जो समय के साथ और भी तीखी हो सकती है ।

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