मुंबई इप्टा ने किया पृथ्वी थिएटर में रविंद्र नाथ का दृष्टि दान

मुंबई में मानसून की फुहारें शुरू हो गई हैं जिसका अर्थ है सड़को पर ट्रैफिक साथ ही जल भराव वैगरा भी शुरू हो चुका हैं । खैर इसी बीच मुंबई इप्टा रविंद्र नाथ टैगोर की कहानी दृष्टी दान पर एक नाटक खेलने जा रही थी जिसका मूल नाम भी वहीं रक्खा था सौभाग्य से मेरे मित्र नीरज पांडेय इस नाटक में नायिका के भाई की भुमिका में थे। मेरे आग्रह पर उन्होंने मेरे नाटक की एक टिकट की व्यवस्था की और एक दुर्भाग्य ये हुआ कि मुझे निकलने कुछ देर हुई और फिर भारी बारिश के कारण मैं कुछ देर से पहुंचा। पृथ्वी थिटेयर का अनुशासन कड़ा हैं उन्होंने प्रवेश देने से मना कर दिया खैर इसी बीच नाटक के निर्देशक रमेश तलवार जी आए और उनकी वजह से मुझे प्रवेश मिल गया।

वैसे तो ये कहानी मूल रूप से रविंद बाबू की है लेकिन दिवंगत सागर सरहदी साहब ने इसे नाटक का स्वरूप दिया और उनके भतीजे रमेश तलवार ने इसे बनाने का निश्चय किया । कोरोना काल में ही सागर साहब हम सबको छोड़ कर चल दिए लेकिन अपने नाटकों के माध्यम से वो आज भी मानो हम सबके बीच जीवित हैं इससे पहले मैंने उनका नाटक तेरे शहर में देखा था।
खैर नाटक का पहला भाग आधे घंटे का ही था जबकि दूसरा भाग एक घंटे का था यानी मेरा नुकसान आधे घंटे का हुआ जिसमें मैने अपने मित्र नीरज पांडेय और उनकी पत्नी अंकिता पांडेय के अलावा अंजन श्रीवास्तव जी का किरदार देख नही पाया।

नाटक एक लड़की पर आधारित है जिसका पति डॉक्टरी की पढ़ाई पढ़ रहा है और अपनी पत्नी के आंखों पर ही अपना इलाज शुरू करता है और उसकी आंखे खराब होने लगती है जिसका उसका भाई विरोध करता हैं की वो इलाज ना करें और एक बंगाली डॉक्टर लेकर आता है जिसकी दवा वो अपने नौकर से फिकवा देती है ताकि उसके पति का मान रह सके और कुमू की आंखे खराब हो जाती है। कुछ दिन बाद कूमू का पति दूसरा विवाह करने की सोचता है लेकिन ऐन वक्त पर कुमु का भाई हेमांगी से विवाह कर न सिर्फ अपनी बहन का जीवन बचा लेता है बल्कि अपने बहनोई को सही रास्ते पर ले आता हैं।
अब आते हैं नाटक के कलाकारों के ऊपर कूमु के पति की भुमिका में है विकास रावत जिन्होंने बड़ी मासूमियत से अपना किरदार निभाया हैं । कुमू के वकील भाई की भुमिका नीरज ने की है ये एक गंभीर किरदार था जिसके साथ उन्होंने पूरा न्याय किया हैं । कुमु की भूमिका प्रियाल घोरे ने निभाया है एक अंधी लड़की की भुमिका करते हुए वो बेहद सहज थी उनका किरदार एक भावनात्मक रूप से ज्यादा मजबूत था लेकिन उनका रोना भी दिल को छू गया।

रंजना श्रीवास्तव अभिनेता अंजन श्रीवास्तव की बेटी है उन्होने नाटक में बेहद प्रभावशाली किरदार हेमांगी को निभाया हैं उनकी भूमिका एक चुलबुली लड़की का हैं उनके आते ही नाटक में एक चुलबुले पन का अहसास होने लगता है और वो नाटक के अंतिम भाग में जब ब्याह कर आती है तो बेहद सहज और दिल को छूती हैं। वैसे अंजन श्रीवास्तव ने भी एक छोटी सी भूमिका निभाई है जिसके बारे में उन्होंने कहा की वो चाहते थे उनकी उपस्थिति से नए कलाकारों का मनोबल बढ़े।
ईप्टा के दिग्गज कलाकार मसूद अख्तर साहब भी छोटी लेकिन प्रभावशाली दिखें।

रमेश तलवार का निर्देशन कमाल का है और स्वर्गीय सागर सरहदी साहब का नाटक लेखन उच्च श्रेणी का हैं।
दृष्टी दान नाटक को देख कर लगा ये आज भी सजीव है और आज के जमाने में कही न कही घटित हो रहा होगा।
नाटक के अंत में मसूद साहब ने स्टेज पर रिंकी भट्टाचार्य को बुलाया ये विमल राय की बेटी और प्रसिद्ध निर्देशक और लेखक वासु भट्टाचार्य की पत्नी है उन्होंने नाटक को बंगाल शैली में देने में अपना खूब योगदान दिया।
खैर इस वक्त रविंद्र नाथ टैगोर के जन्म शताब्दी अवसर चल रहा है ऐसे में इप्टा उन्हे श्रद्धांजलि देने के लिए उनके कई नाटक करने जा रहा हैं।
वैसे इतनी सुंदर प्रस्तुति के लिए पूरी टीम बधाई की पात्र हैं।
धीरज मिश्रा

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